जैविकता से दूर होकर और ज़हर को जिंदगी बनाकर हमने इस जीवनदायिनी प्रकृति का क्या हश्र कर रखा है। हमारे किसान भाइयों को इतना दिग्भ्रमित कर दिया गया है कि वो चाहे सब्जी हो या फल, हर कुछ पेस्ट्रीसाइट के अत्यधिक इस्तेमाल से उपज रहा है जो खेतों की उर्वराशक्ति को धीरे-धीरे कम करने के साथ पर्यावरण को भी प्रभावित करता है। प्रभावित ऐसा-वैसा नहीं, हवा में जहर घोल रहा है। आजकल अनुवांशिक रोगों के अलावा नई पीढ़ियों में जो नई-नई बीमारियां आ रही हैं, उसका भी जवाब इसी से मिलता है। इसी का परिणाम है कि बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते हैं, बच्चे कम वजन पर जन्म लेते हैं और आज कई तरह के कैंसर लाखों जिंदगियों को लील रहे हैं।
आजकल सब्जी खाएं या फल, हर चीज में घुला है जहर
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Apoorva Bajaj
Ath Entertainment
Indian Film maker
Keetnashak
Pankaj Narayan
अपूर्वा बजाज
कीटनाशक
जैविकता से दूर होकर और ज़हर को जिंदगी बनाकर हमने इस जीवनदायिनी प्रकृति का क्या हश्र कर रखा है। हमारे किसान भाइयों को इतना दिग्भ्रमित कर दिया गया है कि वो चाहे सब्जी हो या फल, हर कुछ पेस्ट्रीसाइट के अत्यधिक इस्तेमाल से उपज रहा है जो खेतों की उर्वराशक्ति को धीरे-धीरे कम करने के साथ पर्यावरण को भी प्रभावित करता है। प्रभावित ऐसा-वैसा नहीं, हवा में जहर घोल रहा है। आजकल अनुवांशिक रोगों के अलावा नई पीढ़ियों में जो नई-नई बीमारियां आ रही हैं, उसका भी जवाब इसी से मिलता है। इसी का परिणाम है कि बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते हैं, बच्चे कम वजन पर जन्म लेते हैं और आज कई तरह के कैंसर लाखों जिंदगियों को लील रहे हैं।

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