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हो जाइए तैयार, जल्द आपके शहर में शुरू होगा ऑडिशन


अगर आप गायन से जुड़े हैं और भक्तिभाव से भी प्रेरित हैं, या आप मंदिर में अक्सर भजन कार्यक्रमों में लेते हैं हिस्सा... आपको है उचित मंच की तलाश... तो मत होइए निराश... अपनी खूबी को दीजिए अपना पंख... 'पतंजलि' के सहयोग से 'अथ एंटरटेनमेंट' और 'आस्था' लेकर आ रहा है 'भजन रत्न'। हम ऐसे भजन गायकों की तलाश में हैं जिनमें कुछ करने का है जुनून। आप हिन्दुस्तान के किसी भी क्षेत्र से हों, किसी भी वर्ग से हों, बस बनाइए धुन और हो जाइए तैयार, जल्द ही आपके शहर में शुरू होगा ऑडिशन... आपमें ही से कोई बनेगा देश का 'भजन रत्न'...

हर्षदीप कौर से गुप्तगू...


बॉलीवुड की मशहूर सूफी गायिका हर्षदीप कौर लाइव कंसर्ट के पहले इवेंट के विषय पर, अथ एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक अपूर्वा बजाज के साथ गुप्तगू करतीं हुईं... दिल्ली के पुराना किला पर 'इबादत' लाइव कंसर्ट से ठीक पहले की ये तस्वीर है...

पंकज नारायण की भावनाओं को बयां करते, उनके द्वारा लिखे ये शब्द-साधना

 
 
जब-जब लगा कि मेरी हर बात एक रचना है, तब-तब दाहिने गाल पर किसी गरीब आदमी के थप्पड़ से बना भारत का नक्शा महसूस किया। दादा जी कहते थे- बेटा, तुम्हारी हर बात एक रचना हो न हो, पर हर रचना में एक बात हो और जब सुनसान सड़क पर चलो तो उस समय तुम्हारी कोई औकात होः पंकज नारायण
जब रात में दिमाग़ का शोर थोड़ा कम होता है तो मेरे भीतर एक तनहा शहर चादर तान के सो जाता है। तब मेरा गांव रात भर जागता रहता है मेरे सपनों में, रखवाली करता है मेरी नींद की । शहरों की तरह गांव अपनी तारीख नहीं बदलता। शहर की कुछ तारीखें गांव को बदल देती हैं। मेरे साथ इसके कारण एक अच्छा समीकरण घटित हुआ। गांव ने मुझे शहर पहुंचा दिया और शहर ने अपना बदला लेकर मुझे गांव बना दिया। पंकज नारायण


रहस्य को खोलती ज़ुबां हमेशा ज़मीन से निकलती है, नई फसल की तरह। नई फसल सपनों की नमी से निकलती है, एक औरत की तरह। एक औरत निकलती है एक औरत से ही, पिछली सदी की तरह। पिछली सदी निकलती है मां की आंखों से मेरी तरह। पंकज नारायण

फिल्म को एक नई दिशा देने की जुगत में पंकज और अपूर्वा

 
आज की फिल्में जहां एक ओर मनोरंजनपरक हैं, वहीं एक भावपूर्ण पहलू को पीछे छोड़ती जा रही हैं। उसकी सबसे बड़ी वजह है कि मौजूदा फिल्में जरूरत से अधिक व्यवसायिक तौर पर बनाई जा रही हैं। उनमें वो पहलू कहीं-न-कहीं काफी कम दिखाई दे रहा है, जिन्हें आज भी दर्शकों और समाज का बहुत बड़ा हिस्सा देखना चाह रहा है। फिल्में व्यवसायिक तो होती हैं, लेकिन समाज का आईना भी कहीं जाती हैं। इसलिए उन स्तंभों को भूलना आधुनिकता के नाम पर समाज के साथ बेइमानी ही तो है।

फिल्म की मौजूदा हालत बहस का मुद्दा बन चुका है। ऐसे में फिल्म निर्माता पंकज नारायण और अथ एंटरटेनमेंट की निदेशक अपूर्वा बजाज ने जिस शिद्दत के साथ फिल्म इंडस्ट्री में पदार्पण किया है और शुरुआत से ही सामाजिक मसलों को उठाना प्राथमिक कार्यों में शुमार किया है, उसकी जितनी तारीफ करें कम है। पंकज नारायण ने डोक्यू ‘कीटनाशक’, गंगा अवतरण में प्रस्तुति के लिए काव्य लेखन कर एक नया आगाज किया है। पंकज का मानना भी है कि वो आगे भी जो फिल्म बनाएंगे, उसमें समाज को देखना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। यही कारण है कि उनकी हाल में रिलीज होने वाली फिल्म ‘चल गुरु हो जा शुरू’ भी पाखंडी बाबाओं पर आधारित है। 

बड़ी हस्तियों ने भी इनके लगन को माना है...


 
फिल्म निर्माता पंकज नारायण और अपूर्वा बजाज... फिल्म इंडस्ट्री के उभरते ऐसे दो नाम जो हाल के दिनों में अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर चर्चे में हैं। वो चाहे देश के जाने-माने प्रतिष्ठित संत और परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती हों, या योग गुरु बाबा रामदेव, या मशहूर आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण जी, या राजनीतिक क्षेत्र में देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, या वरिष्ठ पत्रकार आलोक पुराणिक, या गीताश्री... ऐसी कई बड़ी हस्तियां हैं जिन्होंने पंकज और अपूर्वा के सकारात्मक सोच को सराहा है। किन्हीं ने पंकज नारायण द्वारा बनाए गए 'कीटनाशक' डोक्टूमेंट्री को किसानों और देश के लिए वरदान कहा, तो किन्हीं ने गंगा अवतरण में पंकज की लेखनी को सलाम और सम्मानित किया। जल्द ही पंकज और अपूर्वा द्वारा निर्मित एक फिल्म भी रिलीज हो रही है। ऐसे में इंतजार है उसके दर्शकों के बीच धमाल का, क्योंकि कमाल तो होना ही है, आखिर इतनी शिद्दत, लगन और दुआएं बेकार नहीं जातीं...

शूटिंग के पल...







'आस' के टाइटल सॉन्ग की शूटिंग के लिए 
फिल्म निर्माता पंकज नारायण और अपूर्वा बजाज 
बच्चों व अथ एंटरटेनमेंट की टीम के साथ

हर्षदीप कौर से मिलीं अपूर्वा बजाज


12 अप्रैल 2014 को नई दिल्ली के पुराना किला में लाइव कंसर्ट से पहले अपूर्वा बजाज से मिलतीं हर्षदीप कौर... बता दें कि इस लाइव में पाकिस्तान के मशहूर गायक अताउल्ला खां भी आए थे जिनका हिन्दुस्तान में पहली बार लाइव परफॉरमेंस देखा गया। यह कंसर्ट एनजीओ 'आस' के तत्वावधान में संपन्न हुआ। 

अनेक खतरनाक बीमारियों की जड़ है कीटनाशक का प्रयोग... अथ एंटरटेनमेंट की पहल


फसल उत्पादन के लिए जैविक विधि अपनाएं... अथ एंटरटेनमेंट की सार्थल पहल



फिल्म निर्माता पंकज नारायण इसे डोक्यूमेंट्री फिल्म के साथ एक मुहिम मानते हैं जो किसानों के हक में एक चिन्गारी का काम करेगी और फिर एक आंदोलन का शक्ल लेकर पूरे देश में बिगुल बजाएगा और कहेगा- हे किसान जो आज तक ज़हर खेतों में घोला है, उसका असर वर्षों तक तो रहेगा ही, लेकिन अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है, आओ लौटें प्रकृति की ओर जिससे हम सबने खिलवाड़ किया है। ये प्रकृति हमें क्षमा जरूर करेगी और हम जैविक खाद का इस्तेमाल कर एक स्वस्थ और समृद्ध भारत का निर्माण करेंगे।

आजकल सब्जी खाएं या फल, हर चीज में घुला है जहर


जैविकता से दूर होकर और ज़हर को जिंदगी बनाकर हमने इस जीवनदायिनी प्रकृति का क्या हश्र कर रखा है। हमारे किसान भाइयों को इतना दिग्भ्रमित कर दिया गया है कि वो चाहे सब्जी हो या फल, हर कुछ पेस्ट्रीसाइट के अत्यधिक इस्तेमाल से उपज रहा है जो खेतों की उर्वराशक्ति को धीरे-धीरे कम करने के साथ पर्यावरण को भी प्रभावित करता है। प्रभावित ऐसा-वैसा नहीं, हवा में जहर घोल रहा है। आजकल अनुवांशिक रोगों के अलावा नई पीढ़ियों में जो नई-नई बीमारियां आ रही हैं, उसका भी जवाब इसी से मिलता है। इसी का परिणाम है कि बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते हैं, बच्चे कम वजन पर जन्म लेते हैं और आज कई तरह के कैंसर लाखों जिंदगियों को लील रहे हैं।

कीटनाशकों के ही प्रयोग से बढ़ रहा कुपोषण, लाखों बच्चे गंवा चुके जान


एक आंकड़े की मानें तो भारत में हर वर्ष 31 लाख बच्चे की मृत्यु पांच वर्ष से कम उम्र में ही हो जाती हैं। देश-प्रदेश में कुपोषण के ऐसे दर्दनाक दृश्य उन नुमांईदों को शर्मसार करने के लिये काफी है, जो कोठियों से आर्थिक विकास की तस्वीर दिखाने की कोशिश करते है और किसानों को साहूकारों के कर्ज से मुक्ति दिलाने के बहाने आधुनिक बाजारवाद का मंत्र देकर चंद कागजी नोटों की खातिर इस देश को ही ज़हर के हवाले कर रहे हैं। बीमारियां दस्तक तो दे रही हैं, लेकिन हमें तो फुर्सत ही नहीं, इन घुलते ज़हर पर पारखी नज़र अपनाने की। ये घुलता ज़हर एक साजिश का हिस्सा है- हमारी देश की कृषि व्यवस्था को बेपटरी करने के लिए। पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ने के लिए। अर्थव्यवस्था को तबाह करने के लिए। ये साजिश है कि पहले किसानों को पैदावार इतनी दे दो कि उन्हें जहरीले रसायनों को भी खरीदना पड़े तो खरीद ले और मालामाल हो जाए और फिर उनकी सोने सी जमीन को कुछ ही माह में सूखा दो, फिर बंजर बना दो जिसमें मिट्टी तो नजर आए, मगर पत्थर जैसी कड़ी, कुछ फसल हो तो वो भी ज़हर से सनी, किसान तो रहे मगर कर्ज से बेहाल, रास्ता निकले तो बस एक- किसानों की आत्महत्या। इसके अलावा गिद्ध और उल्लू जैसे प्रकृति की रक्षा करने वाले महत्वपूर्ण पशु-पक्षी जहरीले कीटनाशकों के छिड़काव से छटपटाकर दम तोड़ दें। डोक्यूमेंट्री फिल्म 'कीटनाशक' में बताया गया है कि कैसे इन सारे रासायनों के पीछे बाजार में एक माफियाओं का चेन काम कर रहा है। लेकिन जरूरत हमें सावधान होने की है।

कीटनाशक फसलों में इस कदर घुलता है जो पानी से भी न धुलता है


खेतों में कीटनाशक का प्रयोग यानी जहर का प्रयोग है, किसानों को यह समझना होगा। और इससे उपजने वाले फल, फसल व साग-सब्जियों को हम कितना भी धोएं, कुछ नहीं होता, ये सीधे हमारे शरीर में जाता है, हम समझते हैं कि भोजन कर रहे हैं, लेकिन हम असल में जहर खा रहे होते हैं। आज देश में बढ़ रहीं बीमारियां इसी का एक परिणाम है। विशेष जानकारी के लिए देखें पंकज नारायण और अपूर्वा बजाज द्वारा निर्मित डोक्यूमेंट्री फिल्म 'कीटनाशक'

पंकज नारायण और अपूर्वा बजाज की पहल को मीडिया ने सराहा


मीडिया ने भी डोक्यूमेंट्री फिल्म ‘कीटनाशक’ की तारीफ...

डोक्यूमेंट्री फिल्म ‘कीटनाशक’ की प्रदर्शनी की सराहना केवल जनता-जनार्दन में ही नहीं हुई, बल्कि फिल्म निर्माता पंकज नारायण और अपूर्वा बजाज के प्रयास को मीडिया ने भी बखूबी सराहा और कई अखबारों ने पुस्तक मेले में आयोजित कीटनाशक की प्रदर्शनी को प्रमुखता से प्रकाशित किया...

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने पंकज नारायण और अपूर्वा बजाज को किया सम्मानित

      
 ( ग्लोबल होली खेलने के बाद संध्याकाल में आयोजित कार्यक्रम में फिल्म निर्माता पंकज नारायण और अथ एंटरटेनमेंट की निदेशक अपूर्वा बजाज को सम्मानित करते परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती) 
परमार्थ निकेतन में नकेतन के परमाध्यक्ष और देश के जाने-माने संत स्वामी चिदानंद सरस्वती ने खचाखच भरे कार्यक्रम में फिल्म निर्माता पंकज नारायण और अपूर्वा बजाज को सम्मानित किया। स्वामी जी ने कहा कि पंकज और अपूर्वा समाज को एक नई दिशा देने के लिए काम कर रहे हैं और जो काम सुविचार के साथ किया जाए, उसमें सफलता अवश्य मिलती है।