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भजन गायकों के लिए सुनहरा मौका



हमारा देश साधु-संतों का देश रहा है। लेकिन आधुनिकता के दौर में हम अपनी सांस्कृतिक महत्ता को खोते जा रहे हैं। इसी मद्देनज़र अथ एंटरटेनमेंट और आस्था की ओर से एक ऐसी पहल की जा रही है जिससे देश की संस्कृति को और सशक्त किया जा सके। देश के भजन गायकों को एक मंच देने के ख्याल से और भजन गायिकी को मुख्यधारा में लाने के विचार से ‘भजन रत्न’ का आयोजन किया जा रहा है। योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा संचालित पतंजलि के सहयोग से इस शो का मकसद देश के भजन गायकों की खोज कर उनकी प्रतिभा को तराशना है। अर्थात ऐसे नए भजन गायकों के प्रतिभा की खोज होगी, जो आज तक उचित मंच न मिलने के कारण अपनी आवाज़ (भजन गायिकी) को देश के सामने नहीं ला सके। भारतीय संस्कृति और हमारी सामाजिक सभ्यता को बढ़ावा देने के ख्याल से इस शो का उद्देश्य देश में आध्यात्मिक चेतना का विकास करना है। इस शो का पहला राउंड ऑडिशन राउंड होगा, जो 02 जून 2016 से मुंबई से शुरू हो रहा है। दिल्ली, कोलकाता, देहरादून, नोएडा, पटना, हैदराबाद, रांची जैसे 14 बड़े शहरों में भी इस शो का ऑडिशन शुरू होने जा रहा है। इस ऑडिशन में 15 वर्ष से लेकर 56 वर्ष तक के भजन गायक हिस्सा ले सकते हैं। दूसरा राउंड सेलेक्शन रिवाइव राउंड होगा। अथ एंटरटेनमेंट की निदेशक अपूर्वा बजाज बताती हैं कि यह ऐसा मंच तैयार होगा जिससे भजन गायक दुनिया में ख्याति प्राप्त कर सकते हैं। तो अगर आप भजन गायक हैं और आप मंदिरों में भी गाया करते हैं, आपको सुर की परख है तो रहिए तैयार। आपके शहर में जल्द होगा ऑडिशन। 
आप अपनी आवाज़ की रिकॉर्डिंग के साथ अपना पूरा डिटेल  athentertainment@gmail.com पर भी भेज सकते हैं।

हो जाइए तैयार, जल्द आपके शहर में शुरू होगा ऑडिशन


अगर आप गायन से जुड़े हैं और भक्तिभाव से भी प्रेरित हैं, या आप मंदिर में अक्सर भजन कार्यक्रमों में लेते हैं हिस्सा... आपको है उचित मंच की तलाश... तो मत होइए निराश... अपनी खूबी को दीजिए अपना पंख... 'पतंजलि' के सहयोग से 'अथ एंटरटेनमेंट' और 'आस्था' लेकर आ रहा है 'भजन रत्न'। हम ऐसे भजन गायकों की तलाश में हैं जिनमें कुछ करने का है जुनून। आप हिन्दुस्तान के किसी भी क्षेत्र से हों, किसी भी वर्ग से हों, बस बनाइए धुन और हो जाइए तैयार, जल्द ही आपके शहर में शुरू होगा ऑडिशन... आपमें ही से कोई बनेगा देश का 'भजन रत्न'...

अथ एंटरटेनमेंट द्वारा पतंजलि आयुर्वेद के लिए विज्ञापन शूटिंग




इस विज्ञापन में हम किसानों की उन समस्याओं को दिखाते हैं जो अपनी मूलभूत समस्याओं को पूरा करने में भी असमर्थ हो रहे हैं।
पहले किसानः रामू काका (आदित्य लखिया) हैं जिनके पास अपनी बेटी (सुप्रिया कुमारी) की शादी करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है।
दूसरे किसानः सौगारत (इस्तियाक खान) हैं जिनके पास इतना भी पैसा नहीं है कि अपने परिवार के लिए एक छोटा सा आशियाना तक बना सके।
तीसरे किसानः हरिया (ओमकार दास मानिकपुरी / नत्था) हैं जो महाजन से लिए कर्ज का ब्याज तक चुका पाने में असमर्थ है, परिणामस्वरूप महाजन उसके दरवाजे से गाय तक खोल कर ले जाता है।
एक सबसे युवा किसान (हेमंत पाण्डेय) है जो गांव की दयनीय हालत को देखकर बहुत उदास है और अपने गांव की भलाई चाहत है। वो चाहता है कि जो दिन आज उनके किसान भाई देख रहे हैं, उस चिंता की रेखा से सब बाहर निकल जाएं, कुछ ऐसा निदान हो। लेकिन क्या समाधान हो, इस पर वह संशय की स्थिति में है।
निष्कर्षतः पतंजलि की जानकारी होती है। गांव के किसानों के लिए वहीं से राह की प्रशस्ति होती है। पतंजलि के माध्यम से किसानों को अनाज पर उचित कीमत मिलती है। किसान पतंजलि को खड़ी अनाज देते हैं और बदले में किसानों को उचित रकम मिलती है। पतंजलि उन अनाजों से लाभकारी उत्पाद बनाते हैं और बाज़ार में उसे जायज मूल्य पर बेचते हैं। इस तरह से पतंजलि आयुर्वेद के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान होता है। अब वे किसान दिल से पतंजलि आयुर्वेद का आभार प्रकट करते हैं। इस विज्ञापन फिल्म को योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण जी ने खूब सराहा।

सर्वेश कुमार को बधाई देते पंकज और अपूर्वा


मशहूर लेखक व कवि श्री सर्वेश कुमार की उपस्थिति से आज हम काफी सम्मानित महसूस कर रहे हैं। 
श्री कुमार ने समाज में घटित हो रहे विभिन्न मुद्दों पर दिल को छू जाने वाले अंदाज में अपनी लेखनी को जागृत किया है। 22 फरवरी, 2014 को आयोजित हुए वर्ल्ड बुक फेयर में उन्होंने अपनी 14 नई पुस्तकों को बाज़ार में प्रस्तुत किया। ये किताबें भी सामाजिक विषयों पर आधारित हैं।


हर्षदीप कौर से गुप्तगू...


बॉलीवुड की मशहूर सूफी गायिका हर्षदीप कौर लाइव कंसर्ट के पहले इवेंट के विषय पर, अथ एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक अपूर्वा बजाज के साथ गुप्तगू करतीं हुईं... दिल्ली के पुराना किला पर 'इबादत' लाइव कंसर्ट से ठीक पहले की ये तस्वीर है...

पंकज नारायण की भावनाओं को बयां करते, उनके द्वारा लिखे ये शब्द-साधना

 
 
जब-जब लगा कि मेरी हर बात एक रचना है, तब-तब दाहिने गाल पर किसी गरीब आदमी के थप्पड़ से बना भारत का नक्शा महसूस किया। दादा जी कहते थे- बेटा, तुम्हारी हर बात एक रचना हो न हो, पर हर रचना में एक बात हो और जब सुनसान सड़क पर चलो तो उस समय तुम्हारी कोई औकात होः पंकज नारायण
जब रात में दिमाग़ का शोर थोड़ा कम होता है तो मेरे भीतर एक तनहा शहर चादर तान के सो जाता है। तब मेरा गांव रात भर जागता रहता है मेरे सपनों में, रखवाली करता है मेरी नींद की । शहरों की तरह गांव अपनी तारीख नहीं बदलता। शहर की कुछ तारीखें गांव को बदल देती हैं। मेरे साथ इसके कारण एक अच्छा समीकरण घटित हुआ। गांव ने मुझे शहर पहुंचा दिया और शहर ने अपना बदला लेकर मुझे गांव बना दिया। पंकज नारायण


रहस्य को खोलती ज़ुबां हमेशा ज़मीन से निकलती है, नई फसल की तरह। नई फसल सपनों की नमी से निकलती है, एक औरत की तरह। एक औरत निकलती है एक औरत से ही, पिछली सदी की तरह। पिछली सदी निकलती है मां की आंखों से मेरी तरह। पंकज नारायण

फिल्म को एक नई दिशा देने की जुगत में पंकज और अपूर्वा

 
आज की फिल्में जहां एक ओर मनोरंजनपरक हैं, वहीं एक भावपूर्ण पहलू को पीछे छोड़ती जा रही हैं। उसकी सबसे बड़ी वजह है कि मौजूदा फिल्में जरूरत से अधिक व्यवसायिक तौर पर बनाई जा रही हैं। उनमें वो पहलू कहीं-न-कहीं काफी कम दिखाई दे रहा है, जिन्हें आज भी दर्शकों और समाज का बहुत बड़ा हिस्सा देखना चाह रहा है। फिल्में व्यवसायिक तो होती हैं, लेकिन समाज का आईना भी कहीं जाती हैं। इसलिए उन स्तंभों को भूलना आधुनिकता के नाम पर समाज के साथ बेइमानी ही तो है।

फिल्म की मौजूदा हालत बहस का मुद्दा बन चुका है। ऐसे में फिल्म निर्माता पंकज नारायण और अथ एंटरटेनमेंट की निदेशक अपूर्वा बजाज ने जिस शिद्दत के साथ फिल्म इंडस्ट्री में पदार्पण किया है और शुरुआत से ही सामाजिक मसलों को उठाना प्राथमिक कार्यों में शुमार किया है, उसकी जितनी तारीफ करें कम है। पंकज नारायण ने डोक्यू ‘कीटनाशक’, गंगा अवतरण में प्रस्तुति के लिए काव्य लेखन कर एक नया आगाज किया है। पंकज का मानना भी है कि वो आगे भी जो फिल्म बनाएंगे, उसमें समाज को देखना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। यही कारण है कि उनकी हाल में रिलीज होने वाली फिल्म ‘चल गुरु हो जा शुरू’ भी पाखंडी बाबाओं पर आधारित है। 

ये राह कठिन है मगर आसां बना देंगे... अथ एंटरटेनमेंट

 
अथ एंटरटेनमेंट हर दिन अपने एक-एक कदम को सकारत्मकता की दिशा में अग्रसर कर रहा है। अथ एंटरटेनमेंट का सपना और लक्ष्य केवल फिल्मी दुनिया से पैसा कमाना नहीं, इसकी शुरुआत और बुनियाद ही इसलिए पड़ी है कि समाज में फैली हर बुराई को उसका आइना दिखा सकें। हर अच्छाई को और दूर तक फैला सकें। हर आवाज़ को विश्व की क्षितिज पर गुंजायमान कर सकें। इसी का नतीजा है कि फिल्म निर्माता पंकज नारायण द्वारा लिखित 'गंगा अवतरण' का काव्य लेखन रहा है और अपूर्वा बजाज के भी पारस्परिक सहयोग से डोक्यूमेंट्री फिल्म 'कीटनाशक' का प्रसारण देश के विभिन्न राज्यों में हुआ है। यह बताता है कि कैसे किसानों को खेती के लिए जैविक खाद का सहारा लेना चाहिए। कैसे बाजारवाद प्रकृति को निगल रहा है व रासायनों को बढ़ावा दे रहा है। हम कैसे हर दिन जहर खा रहे हैं। ये मुद्दे ऐसे हैं जिससे हमारा और हमारे बच्चों समेत आने वाली पीढ़ियों का अस्तित्व जुड़ा है। आपका साथ चाहिए, ये मुहिम आगे ज्वलंत मुद्दे की तरह सुलगता और हर इंसान को जागृत करने वाला रहेगा, कायम रहेगा। अनवरत और अनंत तक चलता ही रहेगा।

ये राह कठिन है मगर आसां बना देंगे
कह दो उस आसमां से हम जमीं को उठा देंगे
आजिज़ न बना सकता हमें ये वक्त का पहिया
आफ़ताब हमारे साथ है, सच पर आतिश लगा देंगे
‘अथ’ तो शुरुआत का दूसरा नाम है
हम बुराई को भी अच्छाई की आदत लगा देंगे
न पूछ ये आगाज किस अंजाम तक जाएगा
हर बुरे की आंच को हम टीवी पर दिखा देंगे
आदमियत की आफ़ात पर हम चुप न रहेंगे
हर आफ़त को आब-ए-आइना दिखा देंगे
हम फिल्मी हैं मगर हमारा लक्ष्य जुदा है
आइए, हम मिलकर इसका ‘अथ’ करें,

कहें जमाने से ‘अथ’ के साथ नया जमाना बना देंगे।

पंकज नारायण और अपूर्वा बजाज की अताउल्लाह खां से एक मुलाकात



 
पाकिस्तान के मशहूर गायक के साथ फुर्सत के पल... पाकिस्तान के मशहूर गायक अताउल्लाह खां के साथ फिल्म निर्माता पंकज नारायण और अथ एंटरटेनमेंट की निदेशक अपूर्वा बजाज... ये उस वक्त की तस्वीर है जब पुराना किला पर 12 अप्रैल को 'आस' के तत्वावधान में इबादत का आयोजन था, उस लाइव कंसर्ट में सरहद पार पाकिस्तान से शामिल होने के लिए ही अताउल्लाह खां आए थे। बॉलीवुड गायिका हर्षदीप कौर ने भी उस कंसर्ट के सुरीले शाम को और भी दिलकश 
बना दिया। 

बड़ी हस्तियों ने भी इनके लगन को माना है...


 
फिल्म निर्माता पंकज नारायण और अपूर्वा बजाज... फिल्म इंडस्ट्री के उभरते ऐसे दो नाम जो हाल के दिनों में अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर चर्चे में हैं। वो चाहे देश के जाने-माने प्रतिष्ठित संत और परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती हों, या योग गुरु बाबा रामदेव, या मशहूर आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण जी, या राजनीतिक क्षेत्र में देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, या वरिष्ठ पत्रकार आलोक पुराणिक, या गीताश्री... ऐसी कई बड़ी हस्तियां हैं जिन्होंने पंकज और अपूर्वा के सकारात्मक सोच को सराहा है। किन्हीं ने पंकज नारायण द्वारा बनाए गए 'कीटनाशक' डोक्टूमेंट्री को किसानों और देश के लिए वरदान कहा, तो किन्हीं ने गंगा अवतरण में पंकज की लेखनी को सलाम और सम्मानित किया। जल्द ही पंकज और अपूर्वा द्वारा निर्मित एक फिल्म भी रिलीज हो रही है। ऐसे में इंतजार है उसके दर्शकों के बीच धमाल का, क्योंकि कमाल तो होना ही है, आखिर इतनी शिद्दत, लगन और दुआएं बेकार नहीं जातीं...

शूटिंग के पल...







'आस' के टाइटल सॉन्ग की शूटिंग के लिए 
फिल्म निर्माता पंकज नारायण और अपूर्वा बजाज 
बच्चों व अथ एंटरटेनमेंट की टीम के साथ

हर्षदीप कौर से मिलीं अपूर्वा बजाज


12 अप्रैल 2014 को नई दिल्ली के पुराना किला में लाइव कंसर्ट से पहले अपूर्वा बजाज से मिलतीं हर्षदीप कौर... बता दें कि इस लाइव में पाकिस्तान के मशहूर गायक अताउल्ला खां भी आए थे जिनका हिन्दुस्तान में पहली बार लाइव परफॉरमेंस देखा गया। यह कंसर्ट एनजीओ 'आस' के तत्वावधान में संपन्न हुआ। 

अनेक खतरनाक बीमारियों की जड़ है कीटनाशक का प्रयोग... अथ एंटरटेनमेंट की पहल


फसल उत्पादन के लिए जैविक विधि अपनाएं... अथ एंटरटेनमेंट की सार्थल पहल



फिल्म निर्माता पंकज नारायण इसे डोक्यूमेंट्री फिल्म के साथ एक मुहिम मानते हैं जो किसानों के हक में एक चिन्गारी का काम करेगी और फिर एक आंदोलन का शक्ल लेकर पूरे देश में बिगुल बजाएगा और कहेगा- हे किसान जो आज तक ज़हर खेतों में घोला है, उसका असर वर्षों तक तो रहेगा ही, लेकिन अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है, आओ लौटें प्रकृति की ओर जिससे हम सबने खिलवाड़ किया है। ये प्रकृति हमें क्षमा जरूर करेगी और हम जैविक खाद का इस्तेमाल कर एक स्वस्थ और समृद्ध भारत का निर्माण करेंगे।

आजकल सब्जी खाएं या फल, हर चीज में घुला है जहर


जैविकता से दूर होकर और ज़हर को जिंदगी बनाकर हमने इस जीवनदायिनी प्रकृति का क्या हश्र कर रखा है। हमारे किसान भाइयों को इतना दिग्भ्रमित कर दिया गया है कि वो चाहे सब्जी हो या फल, हर कुछ पेस्ट्रीसाइट के अत्यधिक इस्तेमाल से उपज रहा है जो खेतों की उर्वराशक्ति को धीरे-धीरे कम करने के साथ पर्यावरण को भी प्रभावित करता है। प्रभावित ऐसा-वैसा नहीं, हवा में जहर घोल रहा है। आजकल अनुवांशिक रोगों के अलावा नई पीढ़ियों में जो नई-नई बीमारियां आ रही हैं, उसका भी जवाब इसी से मिलता है। इसी का परिणाम है कि बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते हैं, बच्चे कम वजन पर जन्म लेते हैं और आज कई तरह के कैंसर लाखों जिंदगियों को लील रहे हैं।